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हाई कोर्ट का बड़ा आदेश: नोटबंदी की पुरानी करेंसी को अब चार हफ्तों तक बदलने का आदेश जारी

नोटबंदी के बाद सालों से फंसी पुरानी करेंसी को लेकर अब बड़ी राहत की खबर सामने आई है। Punjab and Haryana High Court ने साफ कर दिया है कि अगर पैसा जांच में सही पाया गया है, तो उसे बेकार नहीं छोड़ा जा सकता।

By  10 Apr 2026
Updated:
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रोजवार्ता, नई दिल्ली| नोटबंदी के बाद सालों से फंसी पुरानी करेंसी को लेकर अब बड़ी राहत की खबर सामने आई है। Punjab and Haryana High Court ने साफ कर दिया है कि अगर पैसा जांच में सही पाया गया है, तो उसे बेकार नहीं छोड़ा जा सकता। कोर्ट ने Reserve Bank of India (RBI) को आदेश दिया है कि जब्त की गई और बाद में वापस की गई करीब 14.15 लाख रुपये की पुरानी करेंसी को 4 हफ्ते के अंदर नई करेंसी में बदला जाए।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, एक व्यक्ति की ये रकम पहले Central Bureau of Investigation (CBI) ने जब्त की थी। बाद में Income Tax Department ने भी इसकी जांच की। लंबी जांच-पड़ताल के बाद 17 जुलाई 2025 को आयकर विभाग ने साफ कर दिया कि पैसा पूरी तरह वैध है और उसे वापस कर दिया जाए।

इसके बाद 30 जुलाई 2025 को पंचनामा के जरिए 14,15,000 रुपये लौटा दिए गए। लेकिन दिक्कत ये हुई कि ये पैसे पुरानी करेंसी में थे, जो अब चलन से बाहर हो चुकी है। इसी पर आज फैसला आया है।

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RBI ने क्यों रोका?

पीड़ित व्यक्ति ने कई बार RBI से संपर्क किया, लेकिन हर बार कोई ठोस जवाब नहीं मिला। आखिर में मजबूर होकर उसने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान RBI ने 12 मई 2017 की केंद्र सरकार की अधिसूचना का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि अगर जब्त की गई पुरानी करेंसी का पूरा रिकॉर्ड मौजूद हो, तो उसे बदला जा सकता है।

कोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस जगमोहन बंसल की बेंच ने साफ कहा कि इस केस में सभी नियम पूरे हो चुके हैं—

✔ पैसा जब्त हुआ

✔ उसका रिकॉर्ड मौजूद है

✔ जांच के बाद वैध मानकर वापस किया गया

ऐसे में RBI के पास एक्सचेंज से इनकार करने का कोई ठोस कारण नहीं बनता। कोर्ट ने आदेश देते हुए कहा कि पंचनामा में दर्ज नोटों का वेरिफिकेशन करके 4 हफ्ते के अंदर नई करेंसी दी जाए।

क्यों है ये फैसला अहम?

ये फैसला सिर्फ एक व्यक्ति के लिए राहत नहीं है, बल्कि नोटबंदी के बाद फंसे ऐसे कई मामलों के लिए रास्ता खोल सकता है। कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि अगर सरकार किसी पैसे को वैध मान चुकी है, तो उसे कागजी प्रक्रिया में फंसा कर बेकार नहीं किया जा सकता।

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